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हिन्दी शब्दकोश से अशिर शब्द का अर्थ तथा उदाहरण पर्यायवाची एवं विलोम शब्दों के साथ।

अशिर (संज्ञा)

१. संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / प्राकृतिक वस्तु
    संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / रासायनिक वस्तु

अर्थ : एक बहुमूल्य रत्न जो चमकीला और बहुत कठोर होता है।

उदाहरण : हीरे जड़ित आभूषण बहुत महँगे होते हैं।

पर्यायवाची : अभेद्य, अलमास, अविक, आबगीन, कुलिश, वज्र, वज्रसार, वरारक, वराहक, हीर, हीरक, हीरा

अत्यंत कठीण, देदीप्यमान व मौल्यवान असा एक खडा.

कोळश्याच्या खाणीतच हिरा सापडतो
हिरा

A transparent piece of diamond that has been cut and polished and is valued as a precious gem.

diamond
२. संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / प्राकृतिक वस्तु

अर्थ : जलती हुई लकड़ी, कोयला या इसी प्रकार की और कोई वस्तु या उस वस्तु के जलने पर अंगारे या लपट के रूप में दिखाई देने वाला प्रकाशयुक्त ताप।

उदाहरण : आग में उसकी झोपड़ी जलकर राख हो गई।

पर्यायवाची : अगन, अगनी, अगिआ, अगिन, अगिया, अगिर, अग्नि, अनल, अनिलसखा, अमिताशन, अय, अर्क, अर्दनि, आग, आगि, आगी, आज्यमुक, आतश, आतिश, आशर, आशुशुक्षणि, आश्रयास, कालकवि, चित्रभानु, जगन्नु, जल्ह, तनूनपात्, तनूनपाद्, तपु, तपुर्जंभ, तपुर्जम्भ, तमोनुद, तमोहपह, दाढ़ा, दाव, दाहक, द्यु, धरुण, ध्वांतशत्रु, ध्वांताराति, ध्वान्तशत्रु, ध्वान्ताराति, नीलपृष्ठ, परिजन्मा, पर्परीक, पवन-वाहन, पशुपति, पावक, बरही, बहनी, बाहुल, भारत, मलिनमुख, यविष्ठ, राजन्य, लघुलय, वर्हा, वसु, वसुनीथ, वह्नि, विंगेश, विश्वप्स, वृष्णि, वैश्वानर, शिखि, शिखी, शुक्र, शुचि, सोमगोपा, हुतासन, हृषु, हेमकेली

एखादी गोष्ट जाळू शकणारा प्रकाशयुक्त ताप.

वार्‍यामुळे अग्नी पसरत चालला होता
अग्नी, अनल, अनळ, आग, जाळ, पावक, वन्ही, विस्तव

The process of combustion of inflammable materials producing heat and light and (often) smoke.

Fire was one of our ancestors' first discoveries.
fire, flame, flaming
३. संज्ञा / सजीव / जन्तु / पौराणिक जीव

अर्थ : धर्म-ग्रंथों में मान्य वे दुष्ट आत्माएँ जो धर्म विरोधी कार्य करती हैं तथा देवताओं, ऋषियों आदि की शत्रु हैं।

उदाहरण : पुरातन काल में राक्षसों के डर से धर्म कार्य करना मुश्किल होता था।

पर्यायवाची : अनुशर, अपदेवता, अमानुष, अविबुध, अश्रय, असुर, आकाशचारी, आशर, आसर, आस्रप, कर्बर, कर्बुर, कीलालप, कैकस, जातुधान, तमचर, तमाचारी, तमीचर, तरंत, तरन्त, त्रिदशारि, दतिसुत, दानव, देवारि, दैत, दैत्य, ध्वांतचर, ध्वान्तचर, नरांश, निशाचर, निशाविहार, निशिचर, निषकपुत्र, नृमर, नैऋत, नैकषेय, नैरृत, पलंकष, पलाद, पलादन, यातुधान, रक्तग्रीव, रक्तप, रजनीचर, राक्षस, रात्रिबल, रात्रिमट, रेरिहान, रैनचर, लंबकर्ण, लम्बकर्ण, सुरद्विष, ह्रस्वकर्ण

पुराणांत वर्णिलेले धर्मविरोधी कृत्ये करणारे देव व साधू यांचे शत्रू.

यज्ञात राक्षसांनी विघ्न आणू नये म्हणून विश्वामित्रांनी रामाला यज्ञाचे संरक्षण करण्याची आज्ञा केली
असुर, दानव, दैत्य, राक्षस
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