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हिन्दी शब्दकोश से मरुत् शब्द का अर्थ तथा उदाहरण पर्यायवाची एवं विलोम शब्दों के साथ।

मरुत् (संज्ञा)

१. संज्ञा / सजीव / जन्तु / पौराणिक जीव

अर्थ : हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित एक देवता जो हवा के अधिपति माने जाते हैं।

उदाहरण : वेदों में भी पवनदेव के पूजन का विधान है।

पर्यायवाची : अजिर, अध्यर्ध, अनिल, जगद्बल, दैत्यदेव, पवन, पवनदेव, पवनदेवता, पवमान, मरुत, वायु, वायुदेव, वायुदेवता, विधु, वृष्णि, हवा

हिंदू धर्मग्रंथांत वर्णिलेला एक देव ज्याला वायूचा अधिपती मानले जाते.

वेदांमध्ये देखील पवनदेवच्या पूजेचे विधान आहे.
पवनदेव, पवनदेवता, वायुदेव, वायुदेवता
२. संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / प्राकृतिक वस्तु

अर्थ : प्रायः सर्वत्र चलता रहने वाला वह तत्व जो सारी पृथ्वी पर व्याप्त है और जिसमें प्राणी साँस लेते हैं।

उदाहरण : हवा के अभाव में जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।

पर्यायवाची : अजिर, अध्यर्ध, अनिल, आकाशचारी, आकाशवायु, आशर, आशुग, आशुशुक्षणि, ईरण, घनवाह, जगदायु, जगद्बल, तन्यतु, तलुन, तीव्रगात, धारावनि, धूलिध्वज, निघृष्व, पवन, पवमान, पृषदश्व, पौन, प्रजिन, प्राणंत, प्राणन्त, फणिप्रिय, बयार, बयारि, मृगवाहन, मेघारि, वहति, वायु, विधु, वृष्णि, शार, शीघ्रग, शीघ्रपाणि, संचारी, सञ्चारी, समीर, हवा

न दिसणारे परंतु स्पर्शास समजणारे पंचमहाभूतांतील एक तत्त्व.

वायू मंद वाहत होता.
अनिल, पवन, मरुत, मारुत, वात, वायू, वारा, समीर, समीरण, हवा
३. संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / प्राकृतिक वस्तु

अर्थ : एक बहुमूल्य पीली धातु जिसके गहने आदि बनते हैं।

उदाहरण : आजकल सोने का भाव आसमान छू रहा है।
चैतन्य महापुरुष के शरीर से स्वर्ण जैसी आभा निकलती थी।

पर्यायवाची : अग्नि, अभ्र, अर्ह, अवष्टंभ, अवष्टम्भ, अश्मकर, अष्टापद, आग्नेय, कंचन, कञ्चन, कनक, कांचन, काञ्चन, गारुड़, गोल्ड, चामीकर, ज़र, तामरस, तार्क्ष्य, त्रिनेत्र, दत्र, पुरुद, भद्र, मनोहर, रंजन, रञ्जन, रसविरोधक, वरवर्ण, वर्णि, वसु, शतकुंभ, शतकुम्भ, शतकौंभ, शतकौंभक, शतकौम्भ, शतकौम्भक, शतखंड, शतखण्ड, शातकुंभ, शातकुम्भ, शातकौंभ, शातकौम्भ, शुक्र, श्रीमत्कुंभ, श्रीमत्कुम्भ, सुवरन, सुवर्ण, सोना, स्वर्ण, हाटक, हिरण्य, हेम

पिवळ्या रंगाचा जड व मौल्यवान असा धातू.

राजाच्या खजिन्यात खूप सोने होते
कनक, कांचन, सुवर्ण, सोने, हेम
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