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हिन्दी शब्दकोश से श्वेतवाहन शब्द का अर्थ तथा उदाहरण पर्यायवाची एवं विलोम शब्दों के साथ।

श्वेतवाहन (संज्ञा)

१. संज्ञा / निर्जीव / वस्तु / प्राकृतिक वस्तु

अर्थ : पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने वाला एक उपग्रह।

उदाहरण : चंद्रमा सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है।

पर्यायवाची : अब्ज, अब्धिज, अमीकर, अमीनिधि, अमृत-रश्मि, अमृतकर, अमृतद्युति, अमृतबंधु, अमृतबन्धु, अमृतरश्मि, अमृतवपु, अमृतांशु, इंदव, इंदु, इन्दव, इन्दु, कलाधर, कलानाथ, कलानिधि, चंदा, चंद्र, चंद्रमा, चन्द्र, चन्द्रमा, चाँद, चांद, छायांक, जैवातृक, तमोहपह, तुषारकर, तुषारकिरण, तुहिनकर, तुहिनकिरण, तुहिनदीधित, तुहिनद्युति, तुहिनरश्मि, तुहिनांशु, तुहिनाश्रु, द्विज, द्विजपति, द्विजाति, द्विजेंद्र, द्विजेन्द्र, द्विजेश, नभश्चमस, नभश्चर, निशाधीश, निशानाथ, निशापति, निशामणि, निशारत्न, निशिकर, निशिनाथ, निशिनायक, निशिपति, निशिपाल, निशेश, पतम, पतय, पर्वधि, पीयूषमहस, पीयूषरुचि, पीयूषवर्ष, भग्नात्मा, मयंक, मृगमित्र, मृगांक, यामिनीपति, यामीर, रजनीनाथ, रजनीश, रसपति, राकेश, वरालि, विधु, विश्वप्स, विहंग, विहग, शंभुभूषण, शम्भुभूषण, शशांक, शशाङ्क, शशि, शिवशेखर, शिशिरकर, शिशिरगु, शिशिरमयूख, शीतकर, शीतदीधिति, शीतद्युति, शीतभानु, शीतरश्मि, शीतांशु, शुचि, श्रीसहोदर, श्वेतद्युति, श्वेतधामा, श्वेतभानु, श्वेतमयूख, श्वेतांशु, श्वेतार्चि, सिंधुजन्मा, सिंधुनंदन, सिंधुपु, सितदीधिति, सिन्धुजन्मा, सिन्धुनन्दन, सुधांशु, सुधाकर, सोम, हिमकर, हिमवान्, हिमांशु, हृषु

आकाशात दिसणारा, पृथ्वीभोवती फिरणारा तिचा एकमात्र उपग्रह.

चंद्राला सूर्याप्रमाणे स्वतःचा प्रकाश नाही.
इंदू, चंद्र, चंद्रमा, चांदोबा, निशापति, मयंक, मृगांक, रजनीनाथ, विधू, शशांक, शशि, शीतभानू, शीतांशू, सुधांशु, सुधाकर, सोम, हिमांशू

The natural satellite of the Earth.

The average distance to the Moon is 384,400 kilometers.
Men first stepped on the moon in 1969.
moon
२. संज्ञा / सजीव / जन्तु / पौराणिक जीव

अर्थ : पांडु का मँझला पुत्र।

उदाहरण : अर्जुन बहुत बड़े धनुर्धर थे।

पर्यायवाची : अनघ, अनीलबाजी, अर्जुन, ऐंद्र, ऐन्द्र, किरीटमाली, कौंतेय, कौन्तेय, धंवी, धनंजय, धनञ्जय, धन्वी, नर, पाकशासनि, पार्थ, बासवी, भारत, शक्रनंदन, शक्रनन्दन, शक्रात्मज, श्वेतवाह, सव्यसाची, सुनर

पाच पांडवांपैकी तिसरा.

अर्जुन द्रोणाचार्यांचा आवडता शिष्य होता.
अर्जुन, कौन्तेय, धनंजय, पार्थ

(Hindu mythology) the warrior prince in the Bhagavad-Gita to whom Krishna explains the nature of being and of God and how humans can come to know God.

arjuna
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